चतुर दुल्हन – एक प्रेरणादायक कहानी | Moral Stories In Hindi | हिंदी कहानी – Hindi Story

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चतुर दुल्हन – प्रेरणादायक कहानी | Moral Stories In Hindi | हिंदी कहानी – Hindi Story | Inspirational Story

चतुर दुल्हन - एक प्रेरणादायक कहानी, Moral Stories In Hindi, हिंदी कहानी - Hindi Story
चतुर दुल्हन – एक प्रेरणादायक कहानी | Moral Stories In Hindi | Hindi Story

चतुर दुल्हन – एक प्रेरणादायक कहानी | Moral Stories In Hindi | Hindi Story

सर्वोदय एक्सप्रेस पूरी गति से गुजरात की ओर दौड़ी चली जा रही थी । खिड़की के किनारे बैठी नई दुल्हन जयश्री बाहर  देखती हुई विचारों में खोई थी । दिल्ली में पली और पढ़ी जयश्री  सोच रही थी ‘ न जाने कैसा होगा अहमदाबाद ! न जाने कैसे होंगे वहाँ के व्यक्ति !! अब तो उसे वहाँ ही बसना है । ‘ वह अपने नए परिवार के विषय में भी सोच रही थी । बीच – बीच में वह बारातियों पर भी दृष्टि डाल लेती । दूल्हे सहित कुल पाँच व्यक्ति ही तो आए थे विवाह में । सभी आरंभ से बैठे गप – शप कर रहे थे । पास वाली सीट के एक युवक और एक युवती भी उनके पास बैठकर बातों में लीन थे । 

 

बस जयश्री ही थी , जो चुप बैठी थी । कभी – कभी पास बैठे दूल्हे राजा से ही एक – आध वाक्य बोल लेती थी । वह घूँघट नहीं किए थी , दुल्हन की लाज और संकोच का घूँघट तो था ही । जयश्री ध्यान से सभी की बातें सुन रही थी । उसने पाया कि युवक – युवती उसके परिवार से जल्दी ही बहुत घुल – मिल गए हैं । वे बता रहे थे कि उन्हें भी अहमदाबाद ही जाना है । वे वहीं रहते हैं , वहाँ उनकी कपड़े की मिल है । देखने में भी सौम्य और संपन्न लग रहे हैं । रास्ते में सभी खाते – पीते चल रहे थे । कभी चिउड़ा , कभी श्रीखंड तो कभी खमन ढोकला । गुजराती खाने – पीने का ढेर सारा सामान रखा था । 

 

युवक – युवती भी पास बैठे थे , सभी से घुल – मिल गए थे । अतएव सब अपने साथ – साथ उन्हें भी खिला रहे थे । वे ‘ न – न ‘ भी कर रहे थे , परंतु साथ बैठे थे , परिचित हो चुके थे , इसलिए उन्हें भी खिलाना सामान्य शिष्टाचार था । रास्ता लम्बा हो तो प्रायः सहयात्री ऐसा करते ही हैं । उस युवती ने भी अपना टिफिन खोला और बर्फी निकालकर सबकी प्लेट में रखने लगी । उन लोगों ने बहुत मना किया कि हमारे पास तो बहुत सामान है , पर युवती मानी ही नहीं और बोली- ‘ वाह , आप अपना ही खिलाए जा रहे हैं । हमारा भी तो कुछ चख कर देखिए । बहुत स्वादिष्ट काजू बर्फी है । ‘ जयश्री सबकी प्लेटों में बर्फी रखती उस सुंदर युवती को देखे जा रही थी । 

 

 

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उसने यह भी ध्यान दिया कि युवती ने अपनी और अपने साथी की प्लेट को छोड़ दिया था । जयश्री के मन में तुरंत विचार आया ‘ ये स्वयं क्यों नहीं ले रहे हैं ? ‘ जयश्री ने उससे कहा -‘आप भी तो लीजिए न ! ‘ आप लोगों ने इतना खिला दिया कि सचमुच चूरण खाना पड़ेगा । ‘ लीजिए आप लोग और लीजिए ‘ बर्फी का डिब्बा आगे बढ़ाते हुए वह कहने लगी । ‘ नहीं , हम लोग भी बहुत खा चुके हैं । ‘ जयश्री के स्वसुर कहने लगे । ‘

 

जयश्री तो वैसे भी बहुत कम खा रही थी । माता – पिता का घर , पुराने सभी रिश्तेदार छोड़ते उसका मन उदास था । उसकी प्लेट में अभी भी बहुत सामान बचा था । परंतु बर्फी खाने की उसकी बिल्कुल भी इच्छा न हुई । वह सोचने लगी , देखने में कितने ही भले लगते हों , बातचीत में कितने ही अच्छे हों , पर क्या इन अपरिचितों की चीज खाना उचित है ? इस समय हमारे पास रुपए , कीमती कपड़े , सामान और गहने भी हैं । ‘ जयश्री ने उस बर्फी को छुआ भी नहीं , उसने सबकी आँख बचाकर कागज की प्लेट मोड़कर खिड़की से बाहर फेंक दी । 

 

सब बर्फी की तारीफ कर रहे थे , तो जयश्री ने भी प्रशंसा कर दी । खाते – पीते रात होने लगी । थके हुए तो सब थे ही । सबने अपने अपने बिस्तर लगा लिए । जयश्री को ऊपर वाली शायिका पर भेज दिया गया । सामने ही पति महोदय भी लेट गए । उन्होंने गहनों और रुपयों वाला ब्रीफकेस सिर के नीचे लगा रखा था । जयश्री ने देखा कि पंद्रह बीस मिनट में ही उनकी आँखें मुँद गईं और खर्राटे लेने लगे । उसने नीचे झाँका – सभी सोए हुए पड़े थे , पर थके होते हुए भी जयश्री की आँखों में नींद न थी । हाँ थकान और भाग – दौड़ से उसका सिर अवश्य भारी हो रहा था । वह भी आँखों पर अपनी कोहनी मोड़कर लेट गई । बीच बीच में वह पति को भी निहारती जाती थी । 

 

 

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जयश्री ने कुछ सरसराहट – सी सुनी तो वह चौंकी । उसने कनखियों से पति की ओर देखा तो पाया कि युवक नीचे खड़ा उनके सिरहाने के गहनों वाला ब्रीफकेस धीरे – धीरे निकाल रहा है । जयश्री ने पल भर में निर्णय लिया और कपड़ों से भरा अपना सूटकेस , जो उसके सिर के नीचे लगा था , खींचकर पूरी शक्ति से युवक के सिर पर पीछे से दे मारा । ‘ ‘ हाय ‘ चिल्लाकर वह वहीं बैठ गया । युवती उसे पकड़ने आयी , तब तक तो जयश्री झट से कूद कर उसके पास पहुँच चुकी थी । 

 

उसने युवती की बाँह को पूरी शक्ति से पकड़ लिया और जितना जोर से चिल्ला सकती थी , चिल्लाई- ‘ चोर – चोर , पकड़ो पकड़ो । ‘ रात के सन्नाटे को चीरती हुई जयश्री की आवाज डिब्बे में गूँज उठी । पास वाले कई यात्री और गार्ड भी वहाँ दौड़े चले आए । युवक तो बेहोश पड़ा था । युवती जयश्री से झगड़ रही थी- ‘ तू मुझ पर झूठा आरोप लगाती है । ‘ गार्ड ने आकर युवती को पकड़ लिया । जयश्री ने पूरी बात विस्तार से बताते हुए कहा- ‘ मुझे शक है कि बर्फी में कुछ नशीली चीज मिली हुई है । ‘ तब तक स्टेशन भी आ चुका था । पुलिस आई और दोनों को गिरफ्तार कर लिया । 

 

 

डॉक्टर ने दवा सुँघाकर सभी बारातियों को होश दिलाया । वे तो समझ रहे थे कि अहमदाबाद आ गया है , इसलिए उन्हें उठाया जा रहा है । आँख मलते हुए वे उठ बैठे और पुलिस तथा भीड़ को देखकर भौंचक्के रह गए । उनकी समझ में कुछ न आ रहा था । कुछ देर बाद जब पूरी बात उनकी समझ में आई तो उन्हें जय श्री पर गर्व होने लगा । इसके बाद पूरी रात उनकी पलकें भी न झपकीं । वे जयश्री की प्रशंसा कर रहे थे – ‘ अब हम सब जगे हुए हैं । ‘ तुम निश्चिन्त होकर सो जाओ , बहुत थकी होगी । ‘ जयश्री मन ही मन मुस्करा रही थी । 

 

थोड़ी – सी सावधानी और से सूझबूझ से बड़ा संकट टल गया था । दूसरे दिन अखबार में भी जयश्री के साहस का यह समाचार छपा । बर्फी में नशीली चीज मिली हुई थी । युवक और युवती यात्रियों को नशीली चीज खिलाकर लूटने वाले गिरोह के ही सदस्य थे । दोनों को जेल भेज दिया गया था ।

 


 

 

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